बदला है | कवि देव गढ़वी नानाकपाया
बदला है
सिर्फ एक साल ही तो बस बदला है!
पर दिल का हाल कहां पर बदला है?
बरसती रही यादें, भी मुसलसल
तेरे लिए ख़याल, कहां बदला है!!
किताब-ए-ज़िन्दगी, सफा पलट दिया
दौर-ए-हयात का, सवाल कहां बदला है!!
बदला नसीब तो, बताएंगे तुझे भी
बात इतनी है, बहरहाल कहां बदला है!
समंदर ना समझ हार के लौट जायेंगे!
सफीना बदला है, पतवार कहां बदला है!!
जिद्द पे है वफ़ा की, बात और है तेरी "देव"
लूट लेगा ज़माना, ये सरकार कहां बदला है!!
©️✍🏻 देव गढ़वी
नाना कपाया, मुंद्रा, कच्छ
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