अविनाशी | कवि देवगढ़वी नानाकपाया

*अविनाशी*

_भटक भटक रहे उदासी_
_ऐसे नहीं मिले अविनाशी_

_मन के ही द्वार को खोलो_
_बाहर नहीं घट भीतर डोलो_

_ज्ञान में डुबकी लगाओ_
_भागीरथी है अंदर जाओ_

_दृष्टि से तु पर हो जावे_
_तब हरि दर्शन हो जावे_

*✍🏻 देव गढ़वी, नाना कपाया, मुंद्रा, कच्छ*

#अविनाशी #मनकेद्वार #घटभीतर #ज्ञानकीडुबकी #भागीरथी #हरिदर्शन #भजन #भक्ति #आध्यात्मिक #देवगढवी #नानाकपाया #मुंद्रा #कच्छ #गुजरात #भक्तिरस #संतवाणी #ईश्वरभक्ति #मोक्ष #ध्यान #Kutch #Mundra #DevGadhvi #Bhakti #Spiritual #GujaratiPoetry #HindiPoetry #MojEFakiri

ટિપ્પણીઓ

આ બ્લૉગ પરની લોકપ્રિય પોસ્ટ્સ

संभल जाऊंगा

નહીં આવું- કવિ દેવ ગઢવી નાના કપાયા

મારા હતા | કવિ દેવ ગઢવી