कहाँ है - कवि देव गढ़वी नाना कपाया

_*कहाँ है*_


ये उजड़ा मेरा शहर, उसकी बातें छोड़

मुझे सिर्फ ये बता, अब बसाना कहाँ है!


मुसाफ़िर रहा हूँ, यूँ मैं तो हमेशा ही

बस ये बता मुझे, अब जाना कहाँ है!


इधर आओ उधर आओ, बहुत हुआ ये

अब तू सिर्फ ये बता, आना कहाँ है?


ये चंद साँसें ही है, जो विरासत है मेरी

"देव" हम फकीरों का, खजाना कहाँ है!


🙏


✍️ देव गढवी

मोज - ए - फकीरी

नानकपाया, मुंद्रा, कच्छ


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